बदरूद्दीन तैय्यब जी एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
, न्यायधीश व भारतीय राष्ट्रवादी मुस्लिम लीडर थे। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1844 ई• मुम्बई में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा मुम्बई में हुई फिर कानून की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड चले गए और वहां से बेरिस्टर बनकर लौटे। भारत लौटने पर उन्होंने मुम्बई हाईकोर्ट में उस समय वकालत शुरू की तब वहां न तो कोई न्यायाधीश न कोई वकील भारतीय था ।
1887 में मद्रास अधिवेशन में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। वह अपनी प्रतिभा योग्यता के बल 1895 में मुम्बई हाईकोर्ट के न्यायधीश बनाए गए। बाल गंगाधर तिलक पर ब्रिटिश सरकार द्वारा चलाए गए राजद्रोह के मुकदमे में तिलक को ज़मानत पर छोड़ने का साहसिक कार्य तैय्यब जी ने ही किया था । तैय्यब जी कानून के ज्ञानी थे । वह हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे।।
तैय्यब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहला मुस्लिम अध्यक्ष व मुम्बई हाईकोर्ट में पहला अधिवक्ता बनने का गौरव प्राप्त है। दादा भाई नौरोजी व फिरोज शाह मेहता के सम्पर्क में आने पर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े। मुसलमानो में शिक्षा का प्रचार करने के लिए अन्जुमने इस्लाम नामक संस्था की स्थापना की। मगर अफसोस तैय्यब जी स्वतंत्र भारत न देख सके। 19 अगस्त 1906 को इस महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कानूनविद का निधन हो गया ।

